SEO क्या है What is seo factor जाने हिंदी में।

टेक्नोलॉजी का विकास तेज गति से हो रहा है जिसे डिजिटल दौर के नाम से भी जाना जा रहा है अगर बात करे
डिजिटल दौर विकास की तो

इंटरनेट SearchEngine,  Electronic device.का महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।
और कई ऐसे क्षेत्र है जो इंटरनेटऔर Digital technology
से जुड़ हुए है ।औऱ जुड़ रहे है । जैसे व्यपारिक क्षेत्र ,शिक्षण संथाए ओर मनोरजन क्षेत्र आदि ।
अब बात आती है SEO की तो इसका संबंध कई प्रकार की वेबसाइटो से है  जैसे ईकॉमर्स ओर नॉन ईकॉमर्स आदि तो अगर बात करे ।
Digital technology की तो कई ऐसे व्यपारिक क्षेत्र है । जो इंटरनेट के माध्यम से अपने अपने प्रोडक्ट को वेबसाइटों के जरिये  के  sell और प्रमोट करते है ।

इसी तरह सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन भी एक तरह से इंटरनेट या online  से ही सम्बंधित है ।



SEO क्या है जाने हिंदी में।

सर्च इंजन का सम्बन्ध इंटरनेट से है । इसी प्रकार से
सर्च इंजिन Optimization वेबसाइट या ब्लॉग से जुड़ा हुआ है
सर्च इंजिन जैसे Google, Yahoo,Bing Search Engine.के अन्दर ईकॉमर्स औऱ नॉन ईकॉमर्स औऱ भी कई प्रकार की Submitted वेबसाइट हैं ।
उन में Seo का एक महत्वपूर्ण भाग होता होता है ।क्योकि सर्च इंजिन के टॉप रिजल्ट में फर्स्ट पेज (SERPs) पर जगह उन वेबसाइटों या ब्लॉग को मिलती है ।
जिनका Search Engine Optimization बेहतर तरीके से किया गया होता है ।
वेबसाइटों को सर्च इंजिन के SERPs में टॉप five में रेंक करने के लिए seo के कई फेक्टर या techniques का उपयोग कर।अधिक से अधिक free ऑर्गेनिक ट्रैफिक को लाना जिसे सर्च इंजिन ऑप्टिमाइजेशन कहा जाता है ।


Seo की जरूरत होती है

Blogger
SEO expert

Website owner etc.

SEO करने का Reason
1.ज्यादातर यूज़र सर्च इंजिन के दौरा दिखाए गए टॉप फाइव रिजल्ट या वेबसाइट पर विज़िट करना पसंद करते है ।
2.वेबसाइट ब्लॉग पर ज्यादा से ज्यादा ऑरगैनिक ट्रफिक लाना
3.SERPs पर टॉप में ब्लॉग पोस्ट को रेंक करना।
4 ऑनलाइन business या prodect को वेबसाइट या ब्लॉग के ज़रिए प्रमोट करना
5.सर्च इंजिन की सहायता से वेबसाइट या ब्लॉग की फ्री में मार्केटिंग करना।
6 ऑनलाइन के क्षेत्र में लोकप्रियता या कमाई को बढ़ाया जा सके ।
Seo करने के ऐसे कई कारण है जिससे वेबसाइट ओर ब्लॉग पर seo करना ओर seo के बारे में जानना जरूरी हो जाता है ।
SEO के प्रकार
सर्च इंजिन में सबमिट ज्यादातर वेबसाइटों या ब्लॉग के अन्दर seo के दो महत्वपूर्ण भाग होते है ।

1.on page SEO


2.off page SEO

सर्च इंजिन में कई प्रकार के अल्गोरिथम होते है ।जिनका काम होता है वेबसाइट या ब्लॉग को Crowling,Indexing
कर अपने server में स्टोर करना औऱ रेंक देना।
जिससे यूज़र को अपने सवलो का जवाब मिल सके । अल्गोरिथम में समय समय पर बदलाव होने के कारण seo के भी कई प्रकार अपडेट होते रहते है ।
तो हम S E O के दो महत्वपूर्ण प्रकार के बारे में जानेंगे
1. On Page SEO . एक ऐसा प्रकार है । जो सर्च इंजिन को ब्लॉग या वेबसाइट के अन्तर्गत आने वाले content से संबंधित सम्पूर्ण रूप को जैसे keywords , Description, titels,meta tags, आदि के बारे में जानकारी देते है।
जिससे सर्च इंजिन cantent को क्रोल व इंडेक्स कर टॉप रैंकिंग दे सके।
on page SEO में कई प्रकार के Factor का उपयोग किया जाता है  जैसे.

1.Key Word.किसी विषय  या वस्तुओं से सम्बंधित नाम से या कीवर्ड पर  व्यख्यान कि जाएं अलग अलग प्रकार से  जैसे विषय के टॉपिक को परिभाषित करना ।
उस विषय / वस्तु सम्बन्धित लेख लिखना, सवाल बनाना,जवाब लिखना आदि ।को
एक कीवर्ड्स के सहारे ही अलग अलग प्रकार से कंटेंट का रूप दिया जाता है।
बात करे सर्च इंजिन के कीवर्ड्स पर तो
यूज़र सर्च इंजिन में Query या कीवर्ड जरिए ही सर्च करता है तो उससे सम्बन्धित सर्च इंजिन यूज़र को टॉप रिजल्ट दिखता है ।
सर्च इंजिन के द्वारा शो किये गए रिजल्ट में कीवर्ड्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है ।
Note ब्लॉग या वेबसाइट में कीवर्ड यूज़ करना महत्वपूर्ण है  लेकिन एक लिमिट में यूज़ करना सर्च इंजिन रैंकिंग में मददगार होता है ।
2.Content. में भी कई प्रकार होते है जैसे Image content. Text content  Video content,आदि
लेकिन seo से जोड़ा जाएं तो Content  में भी कई बातों पर ध्यान देना औऱ जानना जरूरी होता हैं जैसे
High Quality Content ब्लॉग या वेबसाइट के कन्टेंट मे यूनिकनेस होनी जरूरी है ।
Content Word Length कीवर्ड के अनुसार होती है।लेकिन Seo  के नज़रिए से देखा जाए तो Above 1000 words होनी चाहिए
Content  यूज़र फ्रेन्डली होना भी जरूरी है ।
Explanation सरल होना चाहिए
Copy काँटेट नही होना चाहिए।
Paragraph हमेशा छोटे छोटे रखे  जैसे 2 से 3 लाइन में
Font Size का ध्यान रखे जिसे यूज़र को पढ़ने में परेशानी न हो।
महत्वपूर्ण कीवर्ड को बोल्ड ,अंडरलाइन,या हाईलाइट आदि करे।

3. Titles.यूज़र हमेशा अपने सवाल या किसी भी टॉपिक के बारे में जानने के लिए सर्च इंजिन पर आता है । तो ब्लॉग या वेबसाइट  में Targeted key word का टाइटल में होना जरूरी है।
Titles के शुरूआत में Keyword का यूज़ करना चाहिए।
Titles में बार बार Keyword का यूज़ नही होना चाहिए।
सर्च इंजिन के अनुसार Title में वर्ड के लेंथ 50-70  के बीच होनी चाहिए। लेकिन SEO के नजरिये से देखा जाए तो 60 के अन्दर अच्छी मानी जाती है 
काँटेट से Related औऱ Unique Titles होना चाहिए।
4.Meta tag Description.कंटेंट से संबंधित सारांश को  शॉर्ट में बताना डिस्क्रिप्शन कहलाता है। और meta टैग डिस्क्रिप्शन का यूज़ कर ब्लॉग पोस्ट को यूज़र ओर seo फ्रेंड्ली  बनाया जा सकता है । जैसे
यूज़र को यह जानने में मदद करती है कि  इस पोस्ट से सवलो जवाब मिल सकता है ।जिससे यूज़र के क्लिक्स करने की सम्भवना बढ़ जाती है। CTR बढ़ने के चांस होते है ।
Meta tag description में Key वर्ड का यूज़ करना

जिसमें वर्ड लिमिट का ध्यान रखना और

पोस्ट से सम्बंधित डिस्क्रिप्शन होनी चाहिए ।

5 .Website Speed. SEO के नजरिए से देखा जाए तो स्पीड की वजह से वेबसाइट या ब्लॉग की रैंकिंग बढ़ने या घटने का असर सर्च इंजिन में देखा जा सकता है । इसलिए
Page speed, image speed, अलग अलग डिवाईस पर
Website की स्पीड fast होनी जरूरी है ।
6.Image Alt Tag. ब्लॉग या पोस्ट में कई बार इमेज का उपयोग करना पड़ता है ।इमेज के जरिए यूज़र को किसी भी टॉपिक के बारे में बिना शब्दो के समझाना आसान हो जाता है ।
इसी प्रकार से सर्च इंजिन को   Alt tag लिख कर बताना होता है कि इमेज किस सब्जेक्ट पर है या इस टॉपिक  के लिए इमेज का यूज़ किया जा रहा है ।
इमेज कॉपीराइट फ्री होनी चाहिए।
Image में word लिमिट होनी चाहिए 8 से 10 शब्दों में।
इमेज साइज को सर्च इंजिन के अनुसार ऑप्टिमाइज़ करना आवश्यक है
7.Heading Tag.कन्टेंट के कुछ important बिन्दु पर फोकस करना या कराना हैडिंग टैग कहलाता है।
 यह यूज़र ओर सर्च इंजिन के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योकि ब्लॉग पोस्ट कई भाग को जोड़े रहती है  जैसे
काँटेट में Titel ,Paragraph ,Key word Question and Answer, इत्यादि में तो heading tag h1 ,h2 , h3, h4,  का यूज़ कर ब्लॉग या वेबसाइट के Content का यूज़र फ्रेन्डली  रूप दिया जाता है ।
H1 Tag.Titel के लिए जरूरी होता है । और यह पहले से डिफॉल्ट रहता है।
H2 Tag.Sub Title या Secand Keyword के लिए यूज़ किया जाता है ।
H3 Tag .Paragraph के heading लिए यूज़ किया जाता है।

8.  Internal Link
एक प्रकार कह सकते है की कन्टेंट  सम्बन्धित  रूपो का आपस मे  कनेक्शन होता है ।
ब्लॉग पर cantent से सम्बन्धित कई प्रकार के पेज होते है । इमेज होते है तो ब्लॉग पोस्ट को एक दूसरे से जोड़ना  इंटरनल लिंकिंग कहलाता है ।
जिसमें आप वेबसाइट या ब्लॉग पर इमेज लिंक,पेज लिंक,टेक्स्ट लिंक,वीडियो लिंकिंग आदि कर सकते है ।
इंटरनल लिंकिंग वैसे तो वेबसाइट ओर ब्लॉग पर कई प्रकार से की जाती है  ।लेकिन जब बात आती है सर्च इंजिन के अनुसार तो इंटरनल लिंकिंग यूज़र फ्रेंड्ली होनी चाहिए । 
इंटरनल लिंकिंग से on page SEO में इफ़ेक्ट को देखा जा सकता है। जैसे
अगर यूज़र को एक पोस्ट से संबंधित दूसरी पोस्ट पर विज़िट करने में आसानी होती है। तो
बाउंस रेट को मेंटेन किया जा सकता है । साथ ही साथ
Pageviews को बढ़ाया जा सकता है । और
सर्च इंजिन को  क्रोल करने में आसानी हो जाती है ।इस तरह से इंटरनल लिंकिंग के एक अच्छे प्रभाव on page seo के नज़रिए से देखा जा सकता है ।
9 URL structure. ब्लॉग पोस्ट का यूनिक यूआरएल होता है ।सर्च इंजिन के लिए ऑप्टिमाइज़ करना होता है । जिसमे
Word की लिमिट को ध्यान में रखना आवयश्क है ।

यूआरएल में टार्गेटेड key word को ad करना होता है ।औऱ Url हमेशा शॉर्ट या छोटा होंना जरूरी है ।
Note.
यूआरएल में special character नही होने चाहिए। जैसे   *,#,@,  इत्यादि
10. डुप्लीकेट कन्टेंट/Copy Content. सर्च इंजिन में कई प्रकार के अल्गोरिथम फेक्टर होते है ।जिससे वेबसाइट या ब्लॉग के डुप्लीकेट कन्टेंट को बिल्कुल पसन्द नही करते है ।अगर ब्लॉग या वेबसाइट में copy content का यूज़ किया जाए तो सर्च इंजिन में रैंकिंग घट  जाती है। और साथ ही साथ कॉपीराइट  issue आ सकता है। इसलिए हमेशा ध्यान रखे कि  Original और Unique कन्टेंट के दौरा सर्च इंजिन में रैंकिंग को बढ़ाया जा सकता है ।
Off page seo क्या है 
OFF PAGE SEO .वेबसाइट या ब्लॉग को सर्च इंजिन के दौरा बाहरी नजरिए से देखे जाना off page seo कहलाता है । जैसे
Web page
image
text Content.
Questions answer इत्यादि।
को एक्सटर्नल लिंकिंग के दौरा other website या ब्लॉग के साथ जोड़ाना व (back link)बनाना या सोशल नेटवर्किंग साइट पर कन्टेंट को शेयर करना आदि।
जिससे सर्च इंजिन के द्वारा कन्टेंट को क्रोल व इंडेक्स कर रैंकिंग देना आसान हो जाता है ।

Off page seo फेक्टर।

1.Valuable Content. Off page seo के कई फेक्टर ऐसे होते है।जहाँ वैल्युएबल कन्टेंट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है बैकलिंक बनाने में या सर्च इंजिन में रैंकिंग बढ़ाने में।
2.Research. off page seo में सबसे महत्वपूर्ण बात आती है तो वो रिसर्च करना ।क्योकि off seo के कई ऐसे फेक्टर होते है जो एक्सटॉरनल/ बाहरी वेबसाइटो से जुड़े रहते है ।
 back link, Question Hub, Competitors आदि।तो

बाहरी वेबसाइटों के बारे में अच्छे से जानना बहुत जरूरी होता है जिससे सर्च इंजिन ऑप्टिमाइजेशन करना आसान हो जाता है। जैसे
Competitors की वेबसाइट या ब्लॉग के  बारे में
Off page Seo Factor का यूज़ करने के लिए वेबसाइटे आपके नीच से सबंधित होनी चाहिए। और
da और pa को जानना बेहद जरूरी है । साथ ही साथ
वेबसाइटो पर यूज़र के सवालों इत्यादि को
3 Back link कन्टेंट से सबन्धित वेबसाइटो के साथ quality Back link बनाना off page seo का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है  ।
जैसे high Domain Authority वाली वेबसाइटो से हमारी वेबसाइट या ब्लॉग पोस्ट को लिंक मिल जाता है तो सर्च इंजिन का ट्रस्ट बना रहता है। जिससे जल्दी से वेबसाइट को रैंक करने मदद मिलती है ।
एक तरह से Quality back link बन जाता है । जिससे वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ जाता है  साथ ही साथ Domain Authority,Page Authority और गूगल सर्च इंजिन में रैंकिंग को बढ़ाया जा सकता है ।
4.Social Media  प्लेटफॉर्म पर कन्टेंट को शेयर करना कन्टेंट के किसी भी प्रकार को जैसे  इमेज, शॉर्ट आंसर, वीडियो आदि से वेबसाइट पर ट्रैफिक को लाना सोशल  media से आसान हो जाता है 
youtube,facebook,pinterest, ट्विटर इत्यादि से ।एक तरह से वेबसाइट की फ्री सोशल मीडिया मार्केटिंग की जा सकती है ।
5. Guest Post.शुरूआत में ब्लॉग या वेबसाइट की popularity कम होने की वजह से तो अपने नीच से सम्बंधित वेबसाइटो पर Guest post लिख सकते हो
जिससे आपकी वेबसाइट या ब्लॉग की लोकप्रियता और रैंकिंग को बढ़ाया जा सकता है ।
6.Content Submission.देखा जाए तो ब्लॉग या   वेबसाइट में काँटेट के कई रूप होते है ।जैसे आर्टिकल ,वीडियो
,इमेज,infograph  जानकारी आदि।तो

ऑफ page seo के लिए काँटेट के कई रूपो को अलग अलग वेबसाइट या ऑनलाइन मंचों पर Subnission करना होता है जैसे
Search engin Submission
forum submission
blog directory submission
Article submission
Video submission
Image Submission
7. Search Engine Submission.

Website / blog posts को अलग अलग प्रकार के सर्च इंजिन जैसे google ,yahoo, bing आदि में वेबमास्टर टूल की सहायता से वेबसाइट को सबमिट करना आवश्यक है ।
 जिससे ब्लॉग पर ट्राफिक को बढ़ाया जा सकता है ।
8. Forum Submissions.एक तरह से आपके ब्लॉग या वेबसाइट के कंटेंट से संबंधितऑनलाइन मंच कह सकते है जहाँ से भी आप ट्रफिक को ला सकते है।

जैसे ब्लॉग या किसी विषय से सम्बन्धित आर्टिकल लिख देते है ।और उन्ही पोस्ट की मदद से यूज़र के सवलो के जवाब भी  भी दे सकते है। fourm साइट को जॉइन कर
औऱ साथ ही साथ फॉर्म साइट पर  विषय सम्बंधित टॉफिक पर group discussion भी सकते है  ।
9.Question and Answers.  वेबसाइट की  popularity ,trust, traffic बढ़ाने के लिए q/answer hub की मदद ले सकते है ।
इंटरनेट पर कई वेबसाइट है जहाँ पर यूज़र अपने सवलो के जवाब ढूंढते है ।और सवाल करते है ।तो आप ऐसी वेबसाइटों को ध्यान में रख कर यूज़र के सवलो के जबाब दे सकते है । या सवलो से संबंधित आर्टिकल का लिंक भी एड कर सकते है ।
10. Update.  off page seo / on page seo. के कई ऐसे फेक्टर होते है जिन्हें update करने साथ वेबसाइट या ब्लॉग को भी अपडेट  रहने की जरूरत होती है ।
 फिर चाहे वो लिंकिंग से संबंधित हो या पुरानी पोस्ट हो या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपडेट हो ।ऐसे कई प्रकार की जानकारी रखनी होगी।
Seo कैसे सीखें
मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन से seo को free में सिख सकते है ।
1. फ्री ब्लॉग या वेबसाइट बनाकर
2.SEO सम्बन्धित free PDF book download कर
3.Youtube पर वीडियो SEO course से
4.टॉप वेबसाइटों का अध्ययन कर
5. अलग प्रकार के seo सम्बन्धित आर्टिकल को पढ़ कर।
तो दोस्तों में आशा करता हूँ कि आपको on page seo kya है और off page seo क्या है ।साथ ही साथ off page seo Factor के बारे में ओर on page seo Factor पर महत्वपूर्ण जानकारी मिल गयी होगी ।

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